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*जय चामुण्डा माताजी की*
सालेचा परिवार की बुकलेट 1मई 2016
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नाजु देवी पारसमल सालेचा की मारवाड़ चेतना पेपर के द्वारा सालेसा परिवार के बारे में बनाई हुए बुक का विमोसन करते हु मंत्री गण ,विधायक गण ,जिला अध्यक्ष गण और साथ में सालेसा परिवार बाकरा गाँव
नवभारत बाल निकेतन सेकण्डरी स्कूल बाकरारोड में वार्षिक उत्सव के आयोजन पर भामाशाह श्री बलवंत सिंह जी सेबटा चौहान साहब की तरफ से भामाशाह व कार्यकर्ता और कार्यक्रम में भाग...
बाकरा गाँव के निकटवर्ती सायला तेहसील के रेतीले धोरों में पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसने वाले किसानों ने कम समय में ऐसा करिश्मा कर दिखाया है कि अब विदेशों तक पहचान कायम है। किसानों ने एक सपना देखा कि क्या रेतीले धोरों में भी अनार हो सकता है। बस इसी आस के साथ 2010 में जालोर के सायला तहसील में अनार का पहला प्लांट लगाया था। बस 4 साल में अनार तैयार हो गया। अनार की क्वालिटी व स्वादिष्टता के चर्चे दूर-दूर तक छा गए। इसके बाद बाद तो किसानों ने अनार की बंपर बुवाई शुरू कर दी। अब वर्तमान में 4500 हैक्टेयर में अनार की खेती हो रही है।सायला के किसानों ने वो करिश्मा कर दिखाया, मुश्किल तो था लेकिन असंभव नहीं। अब अनार की खेती और उत्पादन में जालौर प्रदेश में पहले पायदान पर है। सायला में कम आर्द्रता के कारण अनार में बीमारियां कम फेल रही है। इसी वजह से अनार की साइज, क्वालिटी और स्वाद अनोखा है। जालोर व बाड़मेर का अनार नेपाल सहित कई देशों में निर्यात हो रहा है। सिंदुरी किस्म का अनार की बंपर पैदावार हो रही है। इसी वजह से अब अनार की खेती में जालोर व बाड़मेर का प्रदेश में पहला स्थान है। 4500 ह...
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